यही एक बीमार की है दुआ, मदीने बुला लीजिएकहीं मर न जाए ग़ुलाम आप का, मदीने बुला लीजिए
हूँ बीमार-ए-ग़म, कोई चारा नहीं है, तबीबों का भी अब सहारा नहीं हैहज़ारों मरज़ की यही है दवा, मदीने बुला लीजिए
कहीं मर न जाए ग़ुलाम आप का, मदीने बुला लीजिए
ज़बां पर है काबा, है दिल में मदीना, हवाले समुंदर के टूटा सफ़ीनाचला है यही कहते या मुस्तफ़ा ! मदीने बुला लीजिए
कहीं मर न जाए ग़ुलाम आप का, मदीने बुला लीजिए
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