नात लिरिक्स

Lahad Mein Wo Soorat Dikhai Gai Hai

लहद में वो सूरत दिखाई गई है

नात ख़्वान: मुहम्मद अली फ़ैज़ीशायर: पीर नसीरुद्दीन नसीरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

लहद में वो सूरत दिखाई गई हैमेरी सोई क़िस्मत जगाई गई है

नहीं था किसी को जो मंज़र पे लानातो क्यूँ बज़्म-ए-'आलम सजाई गई है

सबा से न की जाए क्यूँकर मोहब्बतबहुत उन के कूचे में आई गई है

वहाँ थी फ़िदा मिस्र में इक ज़ुलैख़ायहाँ सदक़े सारी ख़ुदाई गई है

ये क्या कम सनद है मेरी मग़्फ़िरत कीतेरे दर से मय्यत उठाई गई है

गुनहगार उम्मत पे रहमत की दौलतसर-ए-हश्र खुल कर लुटाई गई है

शराब-ए-तुहूर उन के दस्त-ए-करम सेसर-ए-हौज़-ए-कौसर पिलाई गई है

बहुत शाद हैं क़ब्र में अहल-ए-निस्बतनबी की ज़ियारत कराई गई है

किसे ताब-ए-नज़्ज़ारा जाली के आगेनज़र एहतिरामन झुकाई गई है

लहद से, नसीर ! अब चलो तुम भी उठ करउन्हें देखने को ख़ुदाई गई है

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