नात लिरिक्स

Kyun Mujh Se Khafa Ho Ab Tak Tum | Ab Bhool Bhi Jao Jane Do

क्यूँ मुझ से ख़फ़ा हो अब तक तुम | अब भूल भी जाओ जाने दो

शायर: डॉ. मुहम्मद अज़हर ख़ालिदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

क्यूँ मुझ से ख़फ़ा हो अब तक तुम, अब भूल भी जाओ जाने दोक्यूँ माज़ी की यादों में हो गुम, अब भूल भी जाओ जाने दो

ये मेरी दु'आ है कि फिर से एहसास-ए-मुरव्वत हो जाएहम दोनों में रब ही की ख़ातिर यूँ फिर से मोहब्बत हो जाएमाज़ी को भुला कर दोनों में फिर दिल से मवद्दत हो जाएदिल साफ़ करो तुम भी अपना, अब मान भी जाओ जाने दो

माज़ी के दरीचों से यादें हम को भी सताती रहती हैंवो अपनी लड़ाई की बातें, सब याद भी आती रहती हैंआँखों में हमारी वो बातें, यूँ अश्क भी लाती रहती हैंझगड़ों को भुला कर आ जाओ, बातें न बढ़ाओ जाने दो

वो वक़्त भी कैसा अच्छा था, जब साथ निभाया करते थेअल्लाह के रस्ते में हम तुम, यूँ साथ ही जाया करते थेयूँ दीन की मेहनत में हर-जा, हक़ बात सुनाया करते थेआओ कि चलें उस रस्ते पर, नाराज़ी मिटाओ जाने दो

रूठे को मनाना अच्छा है ये मैं ने सिफ़ारिश कर दी हैअब देर तुम्हारी जानिब है, मैं ने तो गुज़ारिश कर दी हैइक तुझ को मनाने की ख़ातिर अश'आर की बारिश कर दी है'अर्ज़ी है मेरी दिल से प्यारी, अब हँस के दिखाओ जाने दो

मैं तुम को मनाने आया हूँ, तुम देर न करना आने मेंतुम मा'फ़ करो जो कुछ भी हुआ, गलती से था या अनजाने मेंतुम बात न रखना कोई भी, अब दिल के किसी भी ख़ाने मेंयूँ मेरे गले से लग जाओ, शिकवे न सुनाओ जाने दो

ग़फ़लत को मिटाओ अपनी तुम, करने को बहुत कुछ बाक़ी हैसुस्ती को भगाओ अपनी तुम, करने को बहुत कुछ बाक़ी हैताक़त भी दिखाओ अपनी तुम, करने को बहुत कुछ बाक़ी हैमैदान में उतरो तुम, अज़हर ! कुछ कर के दिखाओ जाने दो

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