नात लिरिक्स

Darbar-e-Mustafa Mein Zaar-o-Qatar Roya

दरबार-ए-मुस्तफ़ा में ज़ार-ओ-क़तार रोया

नात ख़्वान: अतहर जलालीशायर: डॉ. मुहम्मद अज़हर ख़ालिदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दरबार-ए-मुस्तफ़ा में ज़ार-ओ-क़तार रोयाअपनी जफ़ाएँ सोचीं, मैं बार-बार रोया

दरबार-ए-मुस्तफ़ा में ज़ार-ओ-क़तार रोया

तयबा में फिर रहा था, मुजरिम बना हुआ थासोचे नबी के एहसाँ, मैं बे-शुमार रोया

दरबार-ए-मुस्तफ़ा में ज़ार-ओ-क़तार रोया

कैसे बताऊँ तुम को किस वक़्त चुप हुआ था ?आक़ा के शहर में मैं लैल-ओ-नहार रोया

दरबार-ए-मुस्तफ़ा में ज़ार-ओ-क़तार रोया

अपने नबी के क़दमों को ढूँडता रहा मैंतयबा की गलियों में मैं पैदल सवार रोया

दरबार-ए-मुस्तफ़ा में ज़ार-ओ-क़तार रोया

प्यारे नबी के दर पर जज़्बात ही अलग थेरोया वहाँ ख़ुशी से और सोगवार रोया

दरबार-ए-मुस्तफ़ा में ज़ार-ओ-क़तार रोया

दामन था मेरा ख़ाली, रब का बना सवालीउन की शफ़ा'अतों का उम्मीदवार रोया

दरबार-ए-मुस्तफ़ा में ज़ार-ओ-क़तार रोया

मन मन का इक क़दम था, जब वापसी हुई थीअज़हर ! जुदाई उन की, मैं दिल-फ़िगार रोया

दरबार-ए-मुस्तफ़ा में ज़ार-ओ-क़तार रोयाअपनी जफ़ाएँ सोचीं, मैं बार-बार रोया

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