नात लिरिक्स

Koi Mansoor Koi Ban Ke Ghazali Aae

कोई मंसूर कोई बन के ग़ज़ाली आए

नात ख़्वान: क़ारी शाहिद महमूद क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कोई मंसूर, कोई बन के ग़ज़ाली आएउन के दरबार से हो कर जो सवाली आए

हो मेरे बस में तो मैं दिल में बिठा लूँ उन कोचूम कर जो मेरे सरकार की जाली आए

उन की रहमत को तो ये बात गवारा ही नहींउन की चौखट पे कोई जाए तो ख़ाली आए

उन के अल्ताफ़-ओ-करम बढ़ के ख़रीदेंगे उन्हेंआज भी ले के कोई ज़ौक़-ए-बिलाली आए

उन का जल्वा तो है मौजूद यहाँ भी लेकिनकोई ले कर तो नज़र देखने वाली आए

आँख खोलूँ तो नज़र गुंबद-ए-ख़ज़रा पे पड़ेदिल में झाँकूँ तो नज़र जल्वा-ए-'आली आए

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