नात लिरिक्स

Koi Gul Baqi Rahega Na Chaman Reh Jayega

कोई गुल बाक़ी रहेगा न चमन रह जाएगा

नात ख़्वान: महमूद अत्तारीशायर: किफ़ायत अली काफ़ी मुरादाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

कोई गुल बाक़ी रहेगा न चमन रह जाएगापर रसूलुल्लाह का दीन-ए-हसन रह जाएगा

कोई गुल बाक़ी रहेगा नय चमन रह जाएगापर रसूलुल्लाह का दीन-ए-हसन रह जाएगा

हम-सफ़ीरो बाग़ में है कोई दम का चहचहाबुलबुलें उड़ जाएँगी, सूना चमन रह जाएगा

अतलस-ओ-कमख़्वाब की पोशाक पर नाज़ाँ न होइस तन-ए-बे-जान पर ख़ाकी कफ़न रह जाएगा

नाम-ए-शाहान-ए-जहाँ मिट जाएँगे लेकिन यहाँहश्र तक नाम-ओ-निशान-ए-पंजतन रह जाएगा

जो पढ़ेगा साहिब-ए-लौलाक के ऊपर दुरूदआग से महफ़ूज़ उस का तन-बदन रह जाएगा

सब फ़ना हो जाएँगे, काफ़ी ! व लेकिन हश्र तकना'त-ए-हज़रत का ज़ुबानों पर सुख़न रह जाएगा

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