नात लिरिक्स

Kis Bulandi Pe Sitara Hai Mera Bachpan Se

किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन से

नात ख़्वान: साहिल रज़ा क़ादरीशायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

नाम-ए-मुहम्मद सल्ले-'अलाआँखों की ठंडक, दिल की जिलाआओ उन का ज़िक्र करेंजो हैं दाफ़े'-ए-रंज-ओ-बला

किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन सेज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

मैं ने देखी नहीं ग़ुर्बत कभी अपने घर मेंउन के टुकड़ों पे गुज़ारा है मेरा बचपन से

ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन सेज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

उन की रहमत से ही बनते हैं मेरे काम सभीउन की निस्बत ही वसीला है मेरा बचपन से

ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन सेज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

या नबी या नबी करते हुए दिन गुज़रे हैंयही इक विर्द-वज़ीफ़ा है मेरा बचपन से

ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन सेज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

आल के साथ सहाबा का भी लाज़िम है अदबसाफ़-सुथरा ये 'अक़ीदा है मेरा बचपन से

ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन सेज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

ये दु'आ माँगो कि टूटे न कभी फ़ारूक़ीउन की यादों से जो रिश्ता है मेरा बचपन से

ज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

किस बुलंदी पे सितारा है मेरा बचपन सेज़िक्र-ए-सरकार हवाला है मेरा बचपन से

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