नात लिरिक्स

Jashn Ka Manzar Tha Mahaul Suhana Tha | Arsh Na Kyun Sajta Sarkar Ne Aana Tha

जश्न का मंज़र था माहौल सुहाना था | अर्श न क्यूँ सजता सरकार ने आना था

नात ख़्वान: फ़राज़ अत्तारीशायर: सुहैल कलीम फ़ारूक़ीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

फ़र्श पे नग़्मे थे आक़ा की रिसालत के'अर्श पे चर्चे थे सरकार की 'अज़मत केहूरों के लब पर ख़ुशियों का तराना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

रुत बदल जाए और रात सँवर जाएहुक्म ख़ुदा का हुआ कि वक़्त ठहर जाएरुक गया फ़ौरन जो गर्दिश में ज़माना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

मस्जिद-ए-अक़्सा में क्या मंज़र थे प्यारेपीछे क़तारों में हाज़िर थे नबी सारेआगे मुसल्ले पर सुल्तान-ए-ज़माना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

मंज़िल-ए-सिदरा पर जिब्रील ने 'अर्ज़ कियाशाह-ए-दो-'आलम ! मैं आगे नहीं चल सकताये ही हद मेरी, यही मेरा ठिकाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

एक वसीला है रब से मुलाकातों काआप को हक़ ने दिया तोहफ़ा जो नमाज़ों काअसल में उम्मत की बख़्शिश का बहाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

नूर में, फ़ारूक़ी ! डूबा ये जहाँ होगावक़्त वो क्या होगा, कैसा वो समाँ होगामसनद-ए-'अर्श पे जब हसनैन का नाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

जश्न का मंज़र था, माहौल सुहाना था'अर्श न क्यूँ सजता, सरकार ने आना था

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