नात लिरिक्स

Khudaya Ishq-e-Muhammad Mein Wo Maqam Aaye

ख़ुदाया इश्क़-ए-मुहम्मद में वो मक़ाम आए

नात ख़्वान: राओ हस्सान अली असदउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ख़ुदाया ! 'इश्क़-ए-मुहम्मद में वो मक़ाम आएकि साँस बा'द में पहले नबी का नाम आए

मेरा गदा, मेरा नौकर, मेरा ग़ुलाम आएख़ुदा करे कि मदीने से ये पयाम आए

ग़ुलाम बन के मदीने में आज तक जो गयाकभी ये हो नहीं सकता कि वो नाकाम आए

नबी की आल से उल्फ़त इन'आम-ए-क़ुदरत हैहमारी आल की क़िस्मत पे ये इन'आम आए

नज़र हो गुंबद-ए-ख़ज़रा पे, अजल आ जाएमेरी हयाती का कुछ ऐसा इख़्तिताम आए

मैं अश्क-बार हुआ जब तो ये दु'आ की हैब-रोज़-ए-हश्र तेरे नौकरों में नाम आए

मेरी हयात के लम्हे बसर हों ऐसे, ज़िया !कभी दुरूद लबों पर, कभी सलाम आए

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