नात लिरिक्स

Kash Wo Chehra Meri Aankh Ne Dekha Hota

काश वो चेहरा मेरी आँख ने देखा होता

नात ख़्वान: सय्यिद मंज़ूर-उल-कौनैनशायर: ज़ाहिद फ़ख़रीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

काश ! वो चेहरा मेरी आँख ने देखा होतामुझ को तक़दीर ने उस दौर में लिक्खा होता

बातें सुनता मैं कभी, पूछता मा'नी उन केआप के सामने असहाब में बैठा होता

आयतें अब्र हैं और दश्त ज़माने सारेहम कहाँ जाते अगर प्यास ने घेरा होता

हर सियाह रात में सूरज हैं हदीसें उन कीवो न आते तो ज़माने में अँधेरा होता

फ़ख़री ! जब मस्जिद-ए-नबवी में अज़ानें होतींमैं मदीने से गुज़रता हुआ झोंका होता

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