नात लिरिक्स

Kab Gunahon Se Kanaara Main Karunga Ya Rab

कब गुनाहों से कनारा मैं करूँगा या रब

शायर: मुहम्मद इलयास अत्तार क़ादरीउपलब्ध: हिंदी

कब गुनाहों से कनारा मैं करूँगा या रब !नेक कब ऐ मेरे अल्लाह ! बनूँगा या रब !

कब गुनाहों के मरज़ से मैं शिफ़ा पाउँगाकब मैं बीमार, मदीने का बनूँगा या रब !

गर तेरे प्यारे का जल्वा न रहा पेशे नज़रसख़्तियां नज़्अ की क्यूं कर मैं सहूंगा या रब !

नज़्अ के वक़्त मुझे जल्व-ए-महबूब दिखातेरा क्या जाएगा मैं शाद मरूंगा या रब !

क़ब्र में गर न मुहम्मद के नज़ारे होंगेहश्र तक कैसे मैं फिर तन्हा रहूँगा या रब !

डंक मच्छर का सहा जाता नहीं, कैसे मैं फिरक़ब्र में बिच्छू के डंक आह सहूंगा या रब !

धुप अँधेरे का भी वह्शत का बसेरा होगाक़ब्र में कैसे अकेला मैं रहूँगा या रब !

गर कफ़न फाड़ के सांपों ने जमाया क़ब्ज़ाहाए बरबादी ! कहां जा के छुपूँगा या रब !

क़ब्र महबूब के जल्वों से बसा दे मालिकये करम कर दे तो मैं शाद रहूँगा या रब !

गर तू नाराज़ हुवा मेरी हलाकत होगीहाए ! मैं नारे जहन्नम में जलूँगा या रब !

अफ़्व कर और सदा के लिये राज़ी हो जागर करम कर दे तो जन्नत में रहूँगा या रब !

इज़्न से तेरे सरे हश्र कहें काश ! हुज़ूरसाथ अत्तार को जन्नत में रखूँगा या रब !

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।