नात लिरिक्स

Ilahi Teri Chaukhat Par Bhikari Ban Ke Aaya Hoon | Ilahi Teri Chokhat Par Bhikari Ban Ke Aaya Hoon

इलाही तेरी चौखट पर भिकारी बन के आया हूँ

नात ख़्वान: जुनैद जमशेदशायर: मुफ़्ती मुहम्मद तक़ी उस्मानीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

इलाही ! तेरी चौखट पर भिकारी बन के आया हूँसरापा फ़क़्र हूँ, 'इज्ज़-ओ-नदामत साथ लाया हूँ

भिकारी वो कि जिस के पास झोली है न प्याला हैभिकारी वो जिसे हिर्स-ओ-हवस ने मार डाला है

मता'-ए-दीन-ओ-दानिश नफ़्स के हाथों से लुटवा करसुकून-ए-क़ल्ब की दौलत हवस की भेट चढ़वा कर

लुटा कर सारी पूँजी ग़फ़लत-ओ-'इस्याँ के दलदल मेंसहारा लेने आया हूँ तेरे का'बे के आँचल में

गुनाहों की लिपट से काइनात-ए-क़ल्ब अफ़सुर्दाइरादे मुज़्महिल, हिम्मत शिकस्ता, हौसले मुर्दा

कहाँ से लाऊँ ताक़त दिल की सच्ची तर्जुमानी कीकि किस जंजाल में गुज़री हैं घड़ियाँ ज़िंदगानी की

ख़ुलासा ये कि बस जल भुन के अपनी रू-सियाही सेसरापा फ़क़्र बन कर अपनी हालत की तबाही से

तेरे दरबार में लाया हूँ अपनी अब ज़बूँ-हालीतेरी चौखट के लाइक़ हर 'अमल से हाथ हैं ख़ाली

ये तेरा घर है, तेरे मेहर का दरबार है, मौला !सरापा नूर है इक महबत-ए-अनवार है, मौला !

तेरी चौखट के जो आदाब हैं मैं उन से ख़ाली हूँनहीं जिस को सलीक़ा माँगने का वो सवाली हूँ

ज़ुबाँ ग़र्क़-ए-नदामत दिल की नाक़िस तर्जुमानी परख़ुदाया ! रहम मेरी इस ज़बान-ए-बे-ज़बानी पर

ये आँखें ख़ुश्क हैं, या रब ! इन्हें रोना नहीं आतासुलगते दाग़ हैं दिल में जिन्हें धोना नहीं आता

इलाही ! तेरी चौखट पर भिकारी बन के आया हूँसरापा फ़क़्र हूँ, 'इज्ज़-ओ-नदामत साथ लाया हूँ

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