नात लिरिक्स

Hum Pe Bhi Nazr-e-Karam Ho Aye Shahidon Ke Imam

हम पे भी नज़र-ए-करम हो ऐ शहीदों के इमाम

नात ख़्वान: ग़ुलाम मुस्तफ़ा क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हम पे भी नज़र-ए-करम हो, ऐ शहीदों के इमाम !दस्त-बस्ता बा-अदब करते हैं हम तुम को सलाम

वक़्त-ए-मग़रिब जब फ़लक पर सुर्ख़ियाँ छाने लगीमेरे दिल को कर्बला की याद तड़पाने लगी

हम पे भी नज़र-ए-करम हो, ऐ शहीदों के इमाम !दस्त-बस्ता बा-अदब करते हैं हम तुम को सलाम

तीर और तलवारों के साए में की रब की सनादेखो देखो इस को कहते हैं मोहब्बत की अदा

हम पे भी नज़र-ए-करम हो, ऐ शहीदों के इमाम !दस्त-बस्ता बा-अदब करते हैं हम तुम को सलाम

चाँद जब दसवीं मुहर्रम का नज़र आने लगादिल का हर इक ज़ख़्म आँखों में उतर आने लगा

हम पे भी नज़र-ए-करम हो, ऐ शहीदों के इमाम !दस्त-बस्ता बा-अदब करते हैं हम तुम को सलाम

आप अपने ग़म में मुझ को आज ही कर दें फ़नाक्या ख़बर कब जिस्म से ये जान कर जाए वफ़ा

हम पे भी नज़र-ए-करम हो, ऐ शहीदों के इमाम !दस्त-बस्ता बा-अदब करते हैं हम तुम को सलाम

तेरा हर इक ग़म मिटा देगी ये सच्ची दास्ताँऐ रिफ़ा'ई ! देख पढ़ कर कर्बला की दास्ताँ

हम पे भी नज़र-ए-करम हो, ऐ शहीदों के इमाम !दस्त-बस्ता बा-अदब करते हैं हम तुम को सलाम

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