नात लिरिक्स

Hum Dukhiyon Ke Ghamkhwar Ho Abdul Qadri Jilani

हम दुखियों के ग़म-ख़्वार हो अब्दुल क़ादिर जीलानी

नात ख़्वान: राही बस्तवीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हम दुखियों के ग़म-ख़्वार हो, 'अब्दुल क़ादिर जीलानी !नूर-ए-नज़र-ए-सरकार हो, 'अब्दुल क़ादिर जीलानी !

हक़ का परचम लहराए, नज़्दी का गला कट जाएतुम हैदर की तलवार हो, 'अब्दुल क़ादिर जीलानी !

चमन-ए-ज़हरा की कली हो, या'नी औलाद-ए-'अली होहसनैन के तुम किरदार हो, 'अब्दुल क़ादिर जीलानी !

मँझधार में मुझ को डालो या चाहे मुझे निकालोमोरी नय्या के पतवार हो, 'अब्दुल क़ादिर जीलानी !

दीवाना कहीं बुलाए, इमदाद वहीं पा जाएतुम भले समुंदर पार हो, 'अब्दुल क़ादिर जीलानी !

क़दमों से मुर्दे जिला लो, डूबी बारात निकालोतुम बचपन से सालार हो, 'अब्दुल क़ादिर जीलानी !

तूफ़ान मिले हट जाए, देखे तो भँवर शरमाएतुम ऐसे खेवन-हार हो, 'अब्दुल क़ादिर जीलानी !

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