नात लिरिक्स

Ho Sukoon-e-Dil Jo Mere Liye Wo Kitab Dhoondta Hai Ye Dil | Sukoon e Dil Ki Kitab

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिए वो किताब ढूँडता है ये दिल

शायर: जवेरिआ बतूलउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिएवो किताब ढूँडता है ये दिलदे वफ़ा का दर्स-ए-कमाल जोवो निसाब ढूँडता है ये दिल

थे वो रिफ़'अतों के भी नाज़ जोमिले क़दमों के थे वो साज़ जोगए कारवाँ वो कहाँ कि अबवो ख़्वाब ढूँडता है ये दिल

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिएवो किताब ढूँडता है ये दिलदे वफ़ा का दर्स-ए-कमाल जोवो निसाब ढूँडता है ये दिल

है ये रौनक़ों की जो मुंतज़िरजो लगी है आतिश-ए-ज़वाल इककि खुले हों फिर से गुलों के दरवो शबाब ढूँडता है ये दिल

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिएवो किताब ढूँडता है ये दिलदे वफ़ा का दर्स-ए-कमाल जोवो निसाब ढूँडता है ये दिल

हैं निशान-ए-ख़ूँ या बहार येहै 'उरूज फिर कि ज़वाल येहै अजब सा इक ये जो सिलसिलावो जवाब ढूँडता है ये दिल

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिएवो किताब ढूँडता है ये दिलदे वफ़ा का दर्स-ए-कमाल जोवो निसाब ढूँडता है ये दिल

है मुनाफ़िक़त सी ये जा-ब-जाकि है रौशनी भी ख़फ़ा ख़फ़ारुख़-ए-गुल को इक जो निखार देवो सहाब ढूँडता है ये दिल

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिएवो किताब ढूँडता है ये दिलदे वफ़ा का दर्स-ए-कमाल जोवो निसाब ढूँडता है ये दिल

तन-ए-वाहिदा पे जो ज़ख़्म-ए-दिलहैं सदा ही करते हमें बेकुलकि छुपा सके जो 'इताब सेवो हिजाब ढूँडता है ये दिल

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिएवो किताब ढूँडता है ये दिलदे वफ़ा का दर्स-ए-कमाल जोवो निसाब ढूँडता है ये दिल

ये गुनाहों के हैं हिसार सबसफ़-ए-दुश्मनाँ के हैं ग़ार अबरुख़-ए-शब से फिर हो तुलू'अ सहरवो नक़ाब ढूँडता है ये दिल

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिएवो किताब ढूँडता है ये दिलदे वफ़ा का दर्स-ए-कमाल जोवो निसाब ढूँडता है ये दिल

जो उजड़ गए वो बने समाँकि हों गुंचे भी सभी जवाँजो निशाँ मिटा दे सफ़र के फिरवो सराब ढूँडता है ये दिल

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिएवो किताब ढूँडता है ये दिलदे वफ़ा का दर्स-ए-कमाल जोवो निसाब ढूँडता है ये दिल

दे जो आरज़ू को भी रह-गुज़रकि ये आईना है शिकस्ता-तरजो भुला दे दिल को भी हादिसेवो रिकाब ढूँडता है ये दिल

हो सुकून-ए-दिल जो मेरे लिएवो किताब ढूँडता है ये दिलदे वफ़ा का दर्स-ए-कमाल जोवो निसाब ढूँडता है ये दिल

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