नात लिरिक्स

Har Wali Se Uncha Hai Rutba Ghaus-e-Azam Ka

हर वली से ऊँचा है रुत्बा ग़ौस-ए-आज़म का

नात ख़्वान: आक़िल रज़ा मुरादाबादीशायर: सैफ़ुल्लाह सुल्तानी सँभलीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हर वली से ऊँचा है रुत्बा ग़ौस-ए-आ'ज़म काकुल जहाँ में चलता है सिक्का ग़ौस-ए-आ'ज़म का

मुर्दे क्यूँ न ज़िंदा हों उन के इक इशारे सेमुस्तफ़ा से मिलता है शजरा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

मुश्किलें भी टलती हैं, फ़ैज़ उस को मिलता हैदिल से जो लगाता है ना'रा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

जान-ओ-दिल फ़िदा उन पर कर दिया है वलियों नेऊँचों से भी ऊँचा है रुत्बा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

क्या बयाँ करूँ उन की शान क्या है, सैफ़ुल्लाह !आसमाँ पे होता है चर्चा ग़ौस-ए-आ'ज़म का

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