नात लिरिक्स

Hai Sada-e-Zaman Ya Hasan Ya Hasan

है सदा-ए-ज़मन या हसन या हसन

नात ख़्वान: आज़म क़ादरीशायर: मुहम्मद उस्मान ग़नी फ़रीदीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

हसन को बादशाह-ए-ख़ास-ओ-'आम कहते हैं'अली का नाइब-ए-क़ाइम-मक़ाम कहते हैं

दलील एक ही काफ़ी है उन की 'अज़मत कोउन्हें हुसैन भी अपना इमाम कहते हैं

है सदा-ए-ज़मन या हसन या हसनये 'अली का चमन या हसन या हसन

राहत-ए-फ़ातिमा, हम-शबीह-ए-नबीमुर्तज़ा की फबन या हसन या हसन

लोरियाँ जिस को हूरें सुनाती रहींक़ुदसियों की लगन या हसन या हसन

दुश्मन-ए-जाँ भी ज़ाहिर न होने दियातू अमीन-ओ-अमन या हसन या हसन

छोड़ कर ख़ुत्बा आक़ा उठाएँ जिसेदीन का वो हुसन या हसन या हसन

दो गिरोहों की तू ने कराई सुलह'आफ़ियत का मिशन या हसन या हसन

है, ग़नी ! जिस की माँ 'आबिदा ज़ाहिदाबाप ख़ैबर-शिकन या हसन या हसन

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