नात लिरिक्स

Hai Jahan Mein Kaun Aisa Mutaza Ali Jaisa

है जहाँ में कौन ऐसा मुर्तज़ा अली जैसा

नात ख़्वान: सय्यिद इल्मुद्दीन क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

है जहाँ में कौन ऐसा ? मुर्तज़ा 'अली जैसाकिस का है मक़ाम ऐसा ? मुर्तज़ा 'अली जैसा

का'बे में विलादत का शर्फ़ जिस को हासिल हैकिस का है नसीब ऐसा ? मुर्तज़ा 'अली जैसा

बंद आँख को खोल दी जैसे मुस्तफ़ा आए'इश्क़ हो तो बस ऐसा, मुर्तज़ा 'अली जैसा

हुक्म-ए-रब तहत जिस की फ़ातिमा बनी दुल्हनख़ुश-नसीब कौन ऐसा ? मुर्तज़ा 'अली जैसा

'अर्ज़ है, ख़ुदा ! सीना नूर से मुनव्वर होदिल बना दे बस ऐसा, मुर्तज़ा 'अली जैसा

मैं ग़ुलाम-मुहम्मद हूँ, नाज़ है मैं सय्यिद हूँदादा भी तो है कैसा, मुर्तज़ा 'अली जैसा

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