नात लिरिक्स

Baghdad Mujhe Pahuncha De Khuda Chadar Main Chadhaun Phoolon Ki

बग़दाद मुझे पहुँचा दे ख़ुदा चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

नात ख़्वान: सय्यिद इल्मुद्दीन क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

मैं क़ादरी हूँ, शुक्र है रब्ब-ए-क़दीर काहाथों में मेरे हाथ है पीरान-ए-पीर का

बग़दाद मुझे पहुँचा दे, ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीमैं सदक़े करूँ तन-मन अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

मेरे ग्यारहवीं वाले पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !तेरे दर का मैं फ़क़ीर, ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !मेरी चमका दी तक़दीर, ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !तेरा रुत्बा बे-नज़ीर, ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

बग़दाद मुझे पहुँचा दे, ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीमैं सदक़े करूँ तन-मन अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

फ़रज़ंद-ए-'अली हो नूर-ए-नबी, महबूब-ए-ख़ुदा है ज़ात तेरीइक बार दिखा रौज़ा अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

बग़दाद मुझे पहुँचा दे, ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीमैं सदक़े करूँ तन-मन अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

लाचार, ग़रीब और मुफ़्लिस हूँ, फ़ुर्क़त में हमेशा रोता हूँबुलवा लो मुझे, महबूब-ए-ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

बग़दाद मुझे पहुँचा दे, ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीमैं सदक़े करूँ तन-मन अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

ग़ौस-ए-आ'ज़म का दरबार, अल्लाह अल्लाह क्या कहनाबग़दादी नूरी बाज़ार, अल्लाह अल्लाह क्या कहना

बग़दाद यहाँ से आऊँगा, रौज़ा मैं तेरा जब देखूँगाचौखट पे झुका कर दिल अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

बग़दाद मुझे पहुँचा दे, ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीमैं सदक़े करूँ तन-मन अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

मेरे ग्यारहवीं वाले पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !तेरे दर का मैं फ़क़ीर, ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !मेरी चमका दी तक़दीर, ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !तेरा रुत्बा बे-नज़ीर, ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

बग़दाद मुझे पहुँचा दे, ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीमैं सदक़े करूँ तन-मन अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

का'बा हो, मदीना हो या नजफ़, हर सिम्त नज़र तुम आते होकुछ ऐसी लगी है तुम से लगन, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

बग़दाद मुझे पहुँचा दे, ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीमैं सदक़े करूँ तन-मन अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

दूरी से तेरी, महबूब-ए-ख़ुदा ! ग़िर्बाल हुवा सीना मेराले मुझ को बुला, मेरे मौला ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

बग़दाद मुझे पहुँचा दे, ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीमैं सदक़े करूँ तन-मन अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

मैं दूर हूँ पर मायूस नहीं, फ़ैज़ान तुम्हारा ऐसा हैमुर्शिद में मिला तेरा दर्शन, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

मेरे ग्यारहवीं वाले पीर ! ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !तेरे दर का मैं फ़क़ीर, ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !मेरी चमका दी तक़दीर, ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !तेरा रुत्बा बे-नज़ीर, ग़ौस-ए-आ'ज़म दस्त-गीर !

बग़दाद मुझे पहुँचा दे, ख़ुदा ! चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों कीमैं सदक़े करूँ तन-मन अपना, चादर मैं चढ़ाऊँ फूलों की

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