नात लिरिक्स

Gyarahwin Sharif Manate Rahenge | Niyaz-e-Ghous-e-Azam

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे | नियाज़-ए-ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: क़ारी ख़लील अत्तारीशायर: मौलाना जमील-उर-रहमान क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ले ले ग्यारहवीं वाले दा नाँते डूबी होई तर जाएगी

फ़ैज़ान-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म जारी रहेगाफ़ैज़ान-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म जारी रहेगा

इंशा-अल्लाह ! इंशा-अल्लाह ! इंशा-अल्लाह !

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेफ़ैज़-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म यूँ पाते रहेंगे

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेमाहाना भी, सालाना भीग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे

रखता है जो ग़ौस-ए-आ'ज़म से नियाज़होता है ख़ुश उस से मौला बे-नियाज़

मनाते रहेंगे

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेमाहाना भी, सालाना भीग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे

होंगी आसाँ सारी तेरी मुश्किलेंसिदक़-ए-दिल से ग़ौस की कर दे नियाज़

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेमाहाना भी, सालाना भीग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे

फ़ैज़ान-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म जारी रहेगाफ़ैज़ान-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म जारी रहेगा

इंशा-अल्लाह ! इंशा-अल्लाह ! इंशा-अल्लाह !

है फ़ज़ीलत ग्यारहवीं तारीख़ मेंइस लिए अफ़ज़ल है इस में दे नियाज़

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेमाहाना भी, सालाना भीग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे

फ़ैज़-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म यूँ पाते रहेंगे

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेमाहाना भी, सालाना भीग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे

साज़-ओ-सामाँ की नहीं तख़्सीस कुछजो मुयस्सर हो उसी पर दे नियाज़

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेमाहाना भी, सालाना भीग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे

हाँ अदब, ता'ज़ीम लाज़िम है ज़रूरबे-अदब हरगिज़ न पाए ये नियाज़

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेमाहाना भी, सालाना भीग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे

फ़ैज़ान-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म जारी रहेगाफ़ैज़ान-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म जारी रहेगा

इंशाअल्लाह ! इंशाअल्लाह ! इंशाअल्लाह !

ऐ जमील-ए-क़ादरी ! हुशियार-बाश'उम्र-भर छूटे न तुझ से ये नियाज़

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेमाहाना भी, सालाना भीग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे

फ़ैज़-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म यूँ पाते रहेंगे

ग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगेमाहाना भी, सालाना भीग्यारहवीं शरीफ़ मनाते रहेंगे

इंशा-अल्लाह ! इंशा-अल्लाह ! इंशा-अल्लाह !

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