नात लिरिक्स

Gul-e-Bostan-e-Nabi Ghaus-e-Azam

गुल-ए-बोस्तान-ए-नबी ग़ौस-ए-आज़म

नात ख़्वान: सलमान अत्तारी मदनीशायर: मौलाना जमीलुर्रहमान क़ादरी रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

गुल-ए-बोस्तान-ए-नबी ग़ौस-ए-आ'ज़म !मह-ए-आसमान-ए-'अली ग़ौस-ए-आ'ज़म !

जिसे चाहे कर दे 'अता सर-बुलंदीमिली है तुझे ख़ुसरवी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

वली हो गया वो इशारे से तेरेसदा जिस ने की रह-ज़नी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

बढ़ा हाथ तेरी तरफ़ मुफ़्लिसों कानज़र तेरी जानिब उठी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

तू वो गुल है बाग़-ए-हुसैन-ओ-हसन काकि बू तेरी सब में बसी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

हो सरसब्ज़ शादाब बाग़-ए-तमन्नारहे शाख़ दिल की हरी, ग़ौस-ए-आ'ज़म !

जमील ! अपनी झोली को फैला भरेंगेकि दाता हैं तेरे सख़ी ग़ौस-ए-आ'ज़म

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।