नात लिरिक्स

Dard Apna De Is Qadar Ya Rab

दर्द अपना दे इस क़दर या रब

नात ख़्वान: मुहम्मद महमूद अत्तारीशायर: मौलाना जमीलुर्रहमान क़ादरी रज़वीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

दर्द अपना दे इस-क़दर, या रब !न पड़े चैन 'उम्र-भर, या रब !

मेरी आँखों को दे वो बीनाईतू ही आए मुझे नज़र, या रब !

विर्द मेरा हो तेरा कलमा-ए-पाकजब कि दुनिया से हो सफ़र, या रब !

तेरे महबूब का मैं वासिफ़ हूँदे ज़बाँ में मेरी असर, या रब !

तेरी रहमत जो मेरे साथ रहेमुझ को किस का हो फिर ख़तर, या रब !

जान निकले तो इस तरह निकलेतेरे दर पर हो मेरा सर, या रब !

क़ब्र में और जाँ-कनी के वक़्तजब हो हालत मेरी दिगर, या रब !

सख़्तियों से मुझे बचा लेनारखना रहमत की तू नज़र, या रब !

आस्ताने का अपने रख मँगतान फिरा मुझ को दर-ब-दर, या रब !

मैं ने फैलाया दामन-ए-मक़्सूदभर दे रहमत के तू गुहर, या रब !

मेरे जुर्म-ओ-क़ुसूर पर तू न जाअपनी रहमत पे कर नज़र, या रब !

न ठिकाना मेरा लगेगा कहींतू ने छोड़ा मुझे अगर, या रब !

अपने महबूब का मुझे वासिफ़रख तू रहमत से 'उम्र-भर, या रब !

उन का और उन की आल का सदक़ाख़ातिमा तू ब-ख़ैर कर, या रब !

मेरी औलाद और मेरी बहनेंऔर मेरे मादर-ओ-पिदर, या रब !

जुमला अहबाब और सब अहल-ए-सुननकुल पे रहमत की रख नज़र, या रब !

क़ादिरी है जमील, ऐ ग़फ़्फ़ार !सब गुनह इस के 'अफ़्व कर, या रब !

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