नात लिरिक्स

Phir Utha Walwala-e-Yaad-e-Mugheelan-e-Arab

फिर उठा वलवला-ए-याद-ए-मुग़ीलान-ए-अरब

नात ख़्वान: हाजी मुहम्मद मुश्ताक़ क़ादरी अत्तारीशायर: इमाम अहमद रज़ा ख़ानउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फिर उठा वलवला-ए-याद-ए-मुग़ीलान-ए-'अरबफिर खिंचा दामन-ए-दिल सू-ए-बयाबान-ए-'अरब

बाग़-ए-फ़िरदौस को जाते हैं हज़ारान-ए-'अरबहाए सहरा-ए-'अरब, हाए बयाबान-ए-'अरब

मीठी बातें तेरी दीन-ए-'अजम ईमान-ए-'अरबनमकीं हुस्न तेरा, जान-ए-'अजम शान-ए-'अरब

अब तो है गिर्या-ए-ख़ूँ गौहर-ए-दामान-ए-'अरबजिस में दो ला'ल थे ज़हरा के वो थी कान-ए-'अरब

दिल वही दिल है जो आँखों से हो हैरान-ए-'अरबआँखें वो आँखें हैं जो दिल से हों क़ुर्बान-ए-'अरब

हाए किस वक़्त लगी फाँस अलम की दिल मेंकि बहुत दूर रहे ख़ार-ए-मुग़ीलान-ए-'अरब

फ़स्ल-ए-गुल लाख न हो वस्ल की रख आस हज़ारफूलते फलते हैं बे-फ़स्ल गुलिस्तान-ए-'अरब

सदक़े होने को चले आते हैं लाखों गुलज़ारकुछ 'अजब रंग से फूला है गुलिस्तान-ए-'अरब

'अंदलीबी पे झगड़ते हैं कटे मरते हैंगुल-ओ-बुलबुल को लड़ाता है गुलिस्तान-ए-'अरब

सदक़े रहमत के कहाँ फूल कहाँ ख़ार का कामख़ुद है दामन-कश-ए-बुलबुल गुल-ए-ख़ँदान-ए-'अरब

शादी-ए-हश्र है सदक़े में छुटेंगे क़ैदी'अर्श पर धूम से है दा'वत-ए-मेहमान-ए-'अरब

चर्चे होते हैं ये कुम्हलाए हुए फूलों मेंक्यूँ ये दिन देखते पाते जो बयाबान-ए-'अरब

तेरे बे-दाम के बंदे हैं रईसान-ए-'अजमतेरे बे-दाम के बंदी हैं हज़ारान-ए-'अरब

हश्त-ख़ुल्द आएँ वहाँ कस्ब-ए-लताफ़त को, रज़ा !चार दिन बरसे जहाँ अब्र-ए-बहारान-ए-अरब

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