नात लिरिक्स

Fazl-e-Khuda Se Aaya Rehmat Ka Ban Ke Saya | Ramzan Ka Mahina

फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा से आया रहमत का बन के साया | रमज़ान का महीना

नात ख़्वान: अदनान प्रतापगढ़ीशायर: दिलशाद दिल सिकंदरपुरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

फ़ज़्ल-ए-ख़ुदा से आया, रहमत का बन के सायारमज़ान का महीना, रमज़ान का महीनाने'मत दिलाए रब से, जन्नत दिलाए रब सेबख़्शिश का है ख़ज़ीना, रमज़ान का महीना

क़ुरआँ की आयतों को पढ़ती फ़ज़ा-ए-हर-सूघर-घर से आ रही है इफ़्तारियों की ख़ुश्बूसज्दों में सर सभी के, रौनक़ है मस्जिदों मेंहै महफ़िल-ए-शबीना, रमज़ान का महीना

कितना हसीन-ओ-अफ़ज़ल रब ने बनाया रमज़ाँमोमिन मचल रहा है, सर पीटता है शैताँबस रब की बंदगी है, क्या ख़ूब ज़िंदगी हैसिखला रहा है जीना, रमज़ान का महीना

रब की रज़ा में रोज़ा रखने को नन्हे-मुन्नेज़िद कर रहे हैं माँ से कहीं रोज़े-दार बच्चेइस बार हम भी रोज़ा रखेंगे सुन ले, ऐ माँ !आया जो हसीं महीना, रमज़ान का महीना

क़ुरआन जैसी बोली रख देगा हर ज़बाँ मेंरमज़ान ले के आया पैग़ाम ये जहाँ मेंबुग़्ज़-ओ-हसद मिटा दो, बस रब से लौ लगा लोकिसी से न रखो कीना, रमज़ान का महीना

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