नात लिरिक्स

Durood-e-Ahl-e-Bait | Pyare Nabi Ki Zaat Par Rab Ka Durood Hai

दुरूद-ए-अहल-ए-बैत | प्यारे नबी की ज़ात पर रब का दुरूद है

नात ख़्वान: ज़ोहैब अशरफ़ीशायर: सैफ़ क़ादरी इलाहाबादीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ली ख़म्सतुन उत़्फ़ी बिहा ह़र्रल-वबाइल-ह़ातिमाअल-मुस्तफ़ा वल-मुर्तद़ा वबना हुमा वल-फ़ातिमा

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मदव 'अला सय्यिदिना 'अलिय्यि-व्व-सय्यिदतिना फ़ातिमाव सय्यिदतिना ज़ैनब व सय्यिदिना हसन व सय्यिदिना हुसैनव 'अला आलिही व सह़बिही व बारिक व सल्लिम

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद

प्यारे नबी की ज़ात पर रब का दुरूद हैसुल्तान-ए-दो-जहान पर सब का दुरूद है

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद

या उम्म-ए-अबीहा ! या उम्म-ए-फ़बीहा !या अशरफ़ुन्निसा ! या फ़ातिमा ज़हरा !

या सय्यिदा ! या ज़हरा !

ज़हरा पे भेजते जो दुरूद-ओ-सलाम हैंवो सच्चे ग़ुलाम-ए-मुस्तफ़ा हैं, नेक-नाम हैं

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद

शाह-ए-मर्दां, शेर-ए-यज़्दाँ, क़ुव्वत-ए-परवरदिगारला-फ़ता इल्ला 'अली, ला-सैफ़ इल्ला ज़ुल्फ़िक़ार

अल्लाह के शेर हैदर-ए-कर्रार पर दुरूदहज़रत हसन-हुसैन के किरदार पर दुरूद

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद

ख़ुत्बों ने ज़ैनब के महल-ए-यज़ीद में वो काम कियाकोई मरा भी नहीं और कोई बचा भी नहीं

ज़ैनब की बारगाह में सलाम-ए-नियाज़ हैजो मुर्तज़ा की लाडली, ज़हरा का नाज़ है

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद

जन्नत में फ़ातिमा की कनीज़ें जहाँ रहेंया रब ! मेरी दु'आ है मेरी माँ वहाँ रहें

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद

जन्नत में मुस्तफ़ा के सहाबा जहाँ रहेंया रब ! मेरी दु'आ है मेरे बाबा वहाँ रहें

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मद

पढ़ते हैं गर दुरूद तो मिलता सवाब हैभेजें अगर सलाम तो आता जवाब है

अल्लाहुम्म स़ल्लि-'अला सय्यिदिना व मौलाना मुह़म्मदव 'अला सय्यिदिना 'अलिय्यि-व्व-सय्यिदतिना फ़ातिमाव सय्यिदतिना ज़ैनब व सय्यिदिना हसन व सय्यिदिना हुसैनव 'अला आलिही व सह़बिही व बारिक व सल्लिम

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