नात लिरिक्स

Deen-e-Rasool-e-Pak Ki Pehli Bahar Hai | Abu Bakar Abu Bakar Deen Ki Bahar Hai

दीन-ए-रसूल-ए-पाक की पहली बहार है | अबू-बकर अबू-बकर दीं की बहार है

नात ख़्वान: हाफ़िज़ ज़ैद आफ़ताबशायर: युनूस तहसीनउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

सय्यिदि अबू-बकर ! मुर्शिदी अबू-बकर !

अबू-बकर अबू-बकर दीं की बहार हैअबू-बकर अबू-बकर मुस्तफ़ा का यार है

दीन-ए-रसूल-ए-पाक की पहली बहार हैसिद्दीक़ 'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा का ताजदार है

अत्मम्तु ने'मती का वही राज़दार हैता'लीम-ए-मुस्तफ़ा से बना शाहकार हैसिद्दीक़ है, 'अतीक़ है, वो यार-ए-ग़ार भीया'नी हर एक ज़ाविए से शानदार है

दीन-ए-रसूल-ए-पाक की पहली बहार हैसिद्दीक़ 'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा का ताजदार है

इब्न-ए-अबू-क़ुहाफ़ा को मा'मूली मत समझवो वज्ह-ए-काइनात के बचपन का यार हैहिजरत की शब दलील है इस बात की, जनाब !सिद्दीक़ पर ख़ुदा को बहुत ए'तिबार है

दीन-ए-रसूल-ए-पाक की पहली बहार हैसिद्दीक़ 'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा का ताजदार है

सिद्दीक़ ! तेरी गोद पे क़ुर्बान दो जहाँये मुस्तफ़ा के वास्ते जा-ए-क़रार हैहर दौर के मुसैलिमा खाते हैं इस से ख़ौफ़वो आबरू-ए-मुस्तफ़ा का पहरे-दार है

दीन-ए-रसूल-ए-पाक की पहली बहार हैसिद्दीक़ 'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा का ताजदार है

हर चीज़ जिस ने वार दी ज़ात-ए-रसूल परउस जाँ-निसार-ए-मुस्तफ़ा पे जाँ-निसार हैतहसीन ! इस जहान में खोली है जब से आँखअपनी ज़ुबाँ पे ना'रा-ए-हक़-चार-यार है

दीन-ए-रसूल-ए-पाक की पहली बहार हैसिद्दीक़ 'इश्क़-ए-मुस्तफ़ा का ताजदार है

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