नात लिरिक्स

Chehre Khile Khile Hain, Raushan Hai Sab Ka Seena

चेहरे खिले खिले हैं, रौशन है सब का सीना

नात ख़्वान: शकील सिंधु क़ादरीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

चेहरे खिले खिले हैं, रौशन है सब का सीनाऐसा बनाया रब ने रमज़ान का महीना

चारो तरफ़ बहारें, घर घर में रौनक़े हैंवक़्त-ए-तरावीह देखो आबाद मस्जिदें हैंना'तें पढ़ो नबी की, करो महफ़िल-ए-शबीना

चेहरे खिले खिले हैं, रौशन है सब का सीनाऐसा बनाया रब ने रमज़ान का महीना

उठो जल्दी, मोमिनो ! तुम, करो सहरी की तैयारीक़ुर्बां करो ख़ुदा पर नींद अपनी प्यारी प्यारीनाम उस का ज़िंदगी है, कहते हैं इस को जीना

चेहरे खिले खिले हैं, रौशन है सब का सीनाऐसा बनाया रब ने रमज़ान का महीना

जी भर के लूटें रहमत, रमज़ान की हैं घड़ियाँमाँगें ख़ुदा से बख़्शिश, रमज़ान की हैं घड़ियाँफिर आएगा न हाथों अनमोल ये नगीना

चेहरे खिले खिले हैं, रौशन है सब का सीनाऐसा बनाया रब ने रमज़ान का महीना

तयबा से दूर रह कर दुनिया में जीना क्या हैए'जाज़ ! मेरी रोती आँखों से ये दु'आ हैअल्लाह हमें दिखाए इसी माह में मदीना

चेहरे खिले खिले हैं, रौशन है सब का सीनाऐसा बनाया रब ने रमज़ान का महीना

केवल उपलब्ध श्रेय दिखाए गए हैं; अनुपलब्ध जानकारी का अनुमान नहीं लगाया गया।