नात लिरिक्स

Chamakne Laga Sunniyat Ka Sitaara, Bareli Me Ahmad Raza Jab Se Aaye

चमकने लगा सुन्नियत का सितारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

शायर: हबीबुल्लाह फ़ैज़ीउपलब्ध: हिंदी

चमकने लगा सुन्नियत का सितारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आयेहुवा सर्द फ़ितनों का हर इक शरारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

उधर कुफ्र की सारी तन्ज़ीमे शामिल, इधर अहले-सुन्नत अकेले मुक़ाबिलमगर सुन्नियों ने ही मैदान मारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

चमकने लगा सुन्नियत का सितारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आयेहुवा सर्द फ़ितनों का हर इक शरारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

गो उर्दू में पहले भी थी नात-गोई, मगर काबिले-तज़्किरा थी न कोईफलक छू गया शायरी का मिनारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

चमकने लगा सुन्नियत का सितारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आयेहुवा सर्द फ़ितनों का हर इक शरारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

फ़तावे में इतनी हदीसें सजाई, के जिस पे करे फ़ख्र रूहे-बुखारीबरेली बना सुन्नियों का बुखारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

चमकने लगा सुन्नियत का सितारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आयेहुवा सर्द फ़ितनों का हर इक शरारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

बहुत ही मुनज़्ज़म थे नजदी-वहाबी, थी हरसु ख़राबी ख़राबी ख़राबीहुवा इत्तेहाद उसका कुल पारा-पारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

चमकने लगा सुन्नियत का सितारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आयेहुवा सर्द फ़ितनों का हर इक शरारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

पच्चास-सो उलूम एक सीने में मख़्फ़ी, फ़साना नहीं ये हक़ीक़त है फ़ैज़ीमगर ये हक़ीक़त हुई आशकारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

चमकने लगा सुन्नियत का सितारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आयेहुवा सर्द फ़ितनों का हर इक शरारा, बरेली में अहमद रज़ा जब से आये

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