नात लिरिक्स

Ashraf Tere Langar Se Lakhon Ka Guzara Hai

अशरफ़ तेरे लंगर से लाखों का गुज़ारा है

नात ख़्वान: मुईनुद्दीन बुलबुल-ए-मुस्तजाबउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

ये दर तो हक़ीक़त में दुखियों का सहारा हैअशरफ़ ! तेरे लंगर से लाखों का गुज़ारा है

बिगड़ी हुई तक़दीरें इक पल में सँवरती हैंजिस ने भी मुसीबत में अशरफ़ को पुकारा है

अशरफ़ ! तेरी गलियों से जाएँ तो कहाँ जाएँ ?इस दर का नज़ारा तो जन्नत का नज़ारा है

या अशरफ़ ! करम करना दुखियों ने पुकारा हैमँझधार में है कश्ती और दूर किनारा है

टूटी हुई कश्ती है और दूर किनारा हैगर कोई नहीं अपना, अशरफ़ तो हमारा है

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