नात लिरिक्स

Ashaab-e-Muhammad Haq Ke Wali, Bu-bakr-o-Umar Usmaan-o-Ali

असहाब-ए-मुहम्मद हक़ के वली, बू-बक्र-ओ-उमर उस्मान-ओ-अली

नात ख़्वान: मुहम्मद साजिद क़ादरीशायर: सय्यिद नफ़ीस अल-हुसैनीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

असहाब-ए-मुहम्मद हक़ के वलीबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान-ओ-'अलीयारान-ए-नबी में सब से जलीबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान-ओ-'अली

वो शम'-ए-हरम के परवानेवो ख़त्म-ए-रुसुल के दीवानेहै जिन से महकी दीं की कलीबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान-ओ-'अली

इस्लाम ने जिन को 'इज़्ज़त दीइस्लाम को क़ुव्वत जिन से मिलीईमाँ की रिवायत जिन से चलीबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान-ओ-'अली

तरतीब-ए-ख़िलाफ़त भी है यहीतरतीब-ए-फ़ज़ीलत भी है यहीलगती है यही तरतीब भलीबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान-ओ-'अली

इस नज़्म की ख़ुश्बू फैलेगीये ख़ुश्बू हर-सू फैलेगीगूँजेगा ये नग़्मा गली गलीबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान-ओ-'अली

ये कत्बा हरम की ज़ीनत हैये लौह-ओ-क़लम की ज़ीनत हैलिख, शाह नफ़ीस ! अब इस को जलीबू-बक्र-ओ-'उमर, 'उस्मान-ओ-'अली

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