नात लिरिक्स

Arsh-e-Azam Tak Hai Shohra Khwaja-e-Ajmer Ka

अर्श-ए-आज़म तक है शोहरा ख़्वाजा-ए-अजमेर का

नात ख़्वान: मुहम्मद शरीफ़ रज़ा पालीशायर: मुहम्मद शरीफ़ रज़ा पालीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

'अर्श-ए-आ'ज़म तक है शोहरा ख़्वाजा-ए-अजमेर काबजता है 'आलम में डंका ख़्वाजा-ए-अजमेर का

सय्यिदा ज़हरा 'अली हसनैन के नूर-ए-नज़रपंजतन का है घराना ख़्वाजा-ए-अजमेर का

ये क़ुतुब बाबा फ़रीदुद्दीन साबिर और निज़ामबा-अदब पढ़ते हैं ख़ुत्बा ख़्वाजा-ए-अजमेर का

रहमत-ओ-अनवार की बारिश है पैहम सुब्ह-ओ-शामरौज़ा है 'अक्स-ए-मदीना ख़्वाजा-ए-अजमेर का

हर मुसीबत, हर वबा अमराज़ से महफ़ूज़ हैजो भी पढ़ता है वज़ीफ़ा ख़्वाजा-ए-अजमेर का

हासिदों से हर घड़ी महफ़ूज़ हूँ रब की क़समफ़ैज़ है मुझ पर पुराना ख़्वाजा-ए-अजमेर का

है शरीफ़-ए-क़ादरी पर ख़्वाजा 'उस्माँ की नज़रकहती है दुनिया दिवाना ख़्वाजा-ए-अजमेर का

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