नात लिरिक्स

Agar Taiba Ki Zeenat Gumbad-e-Khazra Nahin Hota

अगर तयबा की ज़ीनत गुंबद-ए-ख़ज़रा नहीं होता

नात ख़्वान: शोऐब रज़ा क़ादरी झाँसीशायर: शोऐब रज़ा क़ादरी झाँसीउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu

अगर तयबा की ज़ीनत गुंबद-ए-ख़ज़रा नहीं होतातो उस शहर-ए-हसीं का नाम भी तयबा नहीं होता

अगर विर्द-ए-दुरूद-ए-पाक मक्खियाँ नहीं करतींज़मीं पर मक्खियों का शहद भी मीठा नहीं होता

है जिस के हाथ में दामन जनाब-ए-ग़ौस-ए-आ'ज़म कानकीरों के सवालों का उसे ख़तरा नहीं होता

कभी का दुश्मनों ने कर दिया होता हमें बे-घरअगर भारत की धरती पर मेरा ख़्वाजा नहीं होता

सदा आती है ये अब भी मज़ार-ए-आ'ला-हज़रत सेबरेली में कभी ईमान का सौदा नहीं होता

जो साया उन का ढूँडे उस से ये, शो'ऐब ! कह देनाअरे अंधे ! ख़ुदा के नूर का साया नहीं होता

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