उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi se mukarne walon ko

ज़िंदगी से मुकरने वालों को

زندگی سے مکرنے والوں کو

शायर: Tahir Azeem6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी से मुकरने वालों को
याद रखते हैं मरने वालों को

इस दरीचे से एक बूढ़ा शख़्स
देखता था गुज़रने वालों को

इतनी फ़ुर्सत नहीं सिमट जाएँ
और देखें बिखरने वालों को

क्या बुलंदी है दरमियाँ अपने
चढ़ रही है उतरने वालों को

कोई हिचकी भी अब नहीं आती
क्या हुआ याद करने वालों को

कौन आवाज़ दे रहा है 'अज़ीम'
उस गली से गुज़रने वालों को