उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hamari ruh kis darja hai pyasi

हमारी रूह किस दर्जा है प्यासी

ہماری روح کس درجہ ہے پیاسی

शायर: Tahir Azeem6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हमारी रूह किस दर्जा है प्यासी
अचानक घेर लेती है उदासी

लिए फिरती है सारी रात हम को
मोहब्बत है या कोई बद-हवासी

वो जिस फ़ुर्सत में तुझ को सोचते थे
मयस्सर भी नहीं है अब ज़रा सी

तो क्यों राजा बने फिरते हो भय्या
कहानी में न रानी है न दासी

यहाँ हर चीज़ पर्दे में है ज़ाहिर
कहाँ जाए हमारी बे-लिबासी

तुझे जाना तो ये जाना है हम ने
त'अल्लुक़ भी है कोई ख़ुद-शनासी