उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zindagi apni hui yar ki fitrat ki tarah

ज़िंदगी अपनी हुई यार की फ़ितरत की तरह

زندگی اپنی ہوئی یار کی فطرت کی طرح

शायर: R P Shokh6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़िंदगी अपनी हुई यार की फ़ितरत की तरह
हम भी कल हों कि न हों उस की इनायत की तरह

वक़्त हम को ये बुरे दिन न दिखाता ऐ काश
हम भी उठ जाते ज़माने से मोहब्बत की तरह

हम तो हर लम्हे को देते रहे साँसों का हिसाब
हम पे टूटा है हर इक लम्हा क़यामत की तरह

गुल खिलाएगा ये मक़्तूल-लहू धरती पर
किसी रुख़्सार पे चढ़ती हुई रंगत की तरह

लोग कहते हैं न क्यों भूल गया मैं उस को
वो कि था जो मिरी बुनियादी ज़रूरत की तरह

ज़िंदगी तो किसी साग़र में ढली तो होती
हम तो पी लेते तुझे जाम-ए-शहादत की तरह