उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chaarasazi ka talabgar lage hai wo bhi

चारासाज़ी का तलबगार लगे है वो भी

چارہ سازی کا طلب گار لگے ہے وہ بھی

शायर: R P Shokh5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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चारासाज़ी का तलबगार लगे है वो भी
इक मसीहा है सो बीमार लगे है वो भी

जिस की ख़ातिर ली ज़माने की अदावत हम ने
अब ज़माने का तरफ़-दार लगे है वो भी

अब रग-ए-जाँ को बचाऊँ तो बचाऊँ कैसे
साँस चलती है तो तलवार लगे है वो भी

किस तरह मंज़िलें तय होंगी बदन की ऐ दिल
उस से मिलता हूँ तो दीवार लगे है वो भी

बे-मुग़ीलाँ सही तपते हुए सहरा का सफ़र
पाँव रखता हूँ मगर ख़ार लगे है वो भी