उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zehn-o-dil mein hai jang ya kuchh aur

ज़ेहन-ओ-दिल में है जंग या कुछ और

ذہن و دل میں ہے جنگ یا کچھ اور

शायर: Iftikhar Raghib10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ेहन-ओ-दिल में है जंग या कुछ और
हो रहा हूँ मलंग या कुछ और

हाल क्या हो गया समाअ'त का
तेरी बातें थीं संग या कुछ और

कोई उतरा है झील में दिल की
उठ रही है तरंग या कुछ और

तेरे हाथों में डोर है या दिल
हो गया हूँ पतंग या कुछ और

कोशिशें राएगाँ मनाने की
मुझ को ही था न ढंग या कुछ और

मुश्किलें रोज़ बढ़ती जाती हैं
वो सितमगर है तंग या कुछ और

दिल में है आस आरज़ू वहशत
बे-क़रारी उमंग या कुछ और

हौसले मेरे मिस्ल कोह हुए
तेरी चाहत है संग या कुछ और

मेरे शे'रों पे हो गए साकित
यार मेरे हैं दंग या कुछ और

उन के हाथों में आज-कल 'राग़िब'
है रिफ़ाक़त का रंग या कुछ और