उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zauq-e-wafa-e-ishq na ruswa karenge hum

ज़ौक़-ए-वफ़ा-ए-'इश्क़ न रुस्वा करेंगे हम

ذوق وفائے عشق نہ رسوا کریں گے ہم

शायर: Raft Bahraichi9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ौक़-ए-वफ़ा-ए-'इश्क़ न रुस्वा करेंगे हम
तड़पाएँगे हुज़ूर तो तड़पा करेंगे हम

यूँ रस्म-ए-बंदगी में इज़ाफ़ा करेंगे हम
उन को बिठा के सामने सज्दा करेंगे हम

हासिल-कलाम 'इश्क़ में और क्या करेंगे हम
बंदा-नवाज़ आप को सज्दा करेंगे हम

क्या ग़म है क्या ख़ुशी है न पूछा करेंगे हम
हर रुख़ से ज़िंदगी का नज़ारा करेंगे हम

दो दिन की ज़ीस्त उस पे अलम की ज़ियादती
इस का ज़रूर आप से शिकवा करेंगे हम

आईना आ चुका है बराबर सुबूत में
वैसा जवाब पाएँगे जैसा करेंगे हम

बढ़ता है ग़म-नसीबों के रोने से और दुख
अब आबलों को अपने न छेड़ा करेंगे हम

दैर-ओ-हरम से शाद कि नाशाद आए हैं
इस बात का किसी से न चर्चा करेंगे हम

'राफ़त' फ़िराक़-ए-दोस्त को बदनाम क्यों करें
सौ लुत्फ़ इंतिज़ार में पैदा करेंगे हम