उर्दू शायरी · ग़ज़ल

diya tha ishq to itna siwa diya hota

दिया था 'इश्क़ तो इतना सिवा दिया होता

دیا تھا عشق تو اتنا سوا دیا ہوتا

शायर: Raft Bahraichi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिया था 'इश्क़ तो इतना सिवा दिया होता
कि अपना होना भी हम ने भुला दिया होता

ग़ुरूर फ़ित्नों का तुम ने दबा दिया होता
अगर ब-नाज़-ए-दिगर मुस्कुरा दिया होता

कमाल-ए-सज्दा था जब सर झुका दिया होता
निफ़ाक़-ए-दैर-ओ-हरम को मिटा दिया होता

सलीक़ा जीने का समझा-बुझा दिया होता
जिन्हें रुलाया था उन को हँसा दिया होता

ज़रूर मुझ को शिकायत है देने वाले से
जो ग़म दिया था तो ग़म में मज़ा दिया होता

ठिकाना मिलता न 'राफ़त' को दोनों 'आलम में
कहीं नज़र से जो तुम ने गिरा दिया होता