उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zara Thahro meri haalat sanbhal jae to phir jaana

ज़रा ठहरो मिरी हालत सँभल जाए तो फिर जाना

ذرا ٹھہرو مری حالت سنبھل جائے تو پھر جانا

शायर: Nadeem Asghar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़रा ठहरो मिरी हालत सँभल जाए तो फिर जाना
दिल-ए-बेताब थोड़ा सा बहल जाए तो फिर जाना

अभी तो फुर्क़तों के सेहर से निकला नहीं हूँ मैं
तुम्हारे वस्ल का जादू ये चल जाए तो फिर जाना

जमी हैं धड़कनें तो मुंजमिद हैं मेरी साँसें भी
बदन में ज़िंदगी थोड़ी मचल जाए तो फिर जाना

अभी जाओ न तुम जकड़ा हुआ है दर्द ने मुझ को
तुम्हारे दर्द का लोहा पिघल जाए तो फिर जाना

तुम्हारे वस्ल से जीने की ख़्वाहिश फिर से जन्मी है
ये नन्ही सी तमन्ना फूल-फल जाए तो फिर जाना