उर्दू शायरी · ग़ज़ल

sham hui ghar lauTi yaaden suraj-rup tarashun kaise

शाम हुई घर लौटी यादें सूरज-रूप तराशूँ कैसे

شام ہوئی گھر لوٹی یادیں سورج روپ تراشوں کیسے

शायर: Nadeem Asghar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

शाम हुई घर लौटी यादें सूरज-रूप तराशूँ कैसे
एक उजाला लाख अंधेरे इस को सब में बाँटूँ कैसे

ठिठुरी चाहत लावा जज़्बे हिज्र-मशक़्क़त बस से बाहर
दिल-चर्ख़े पर सूत तुम्हारी यादों का मैं कातूं कैसे

बंजर रातें बाँझ सवेरे बोझल रस्ते उलझी मंज़िल
दिन जीवन के अब तेरे बिन काटूँ तो फिर काटूँ कैसे

उजड़े मौसम पिघले मंज़र टूटे ख़्वाब आशुफ़्ता लहजे
थोड़ी साँसें बोझ मैं इतना इन काँधों पर लादूँ कैसे

सुर्ख़ उजाले सूखे पानी उगती धूप और मरती छाँव
तपते सहरा चुभते पत्थर इन रस्तों पर भागूँ कैसे

मैं तो रूखी-सूखी तुझ को जान से प्यारे दे सकता हूँ
शाल पे तेरी चाँद सितारे मैं बेचारा टाँकूं कैसे