उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil kaTore par jami ye kai rah jae to phir

दिल कटोरे पर जमी ये काई रह जाए तो फिर

دل کٹورے پر جمی یہ کائی رہ جائے تو پھر

शायर: Nadeem Asghar5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल कटोरे पर जमी ये काई रह जाए तो फिर
घर का हिस्सा मिल भी जाए भाई रह जाए तो फिर

ख़्वाब ढूँडें रास्ता कैसे दर आएँ आँख में
नींद बिस्तर के सिरहाने आई रह जाए तो फिर

क्यों मशीनों की तरह बेहिस हुए जाते हैं हम
यूँ ही पहना सूट बूट और टाई रह जाए तो फिर

तुम कहो तो ज़िंदगी के ऐसे रुख़ दिखलाऊँ मैं
तुम पे पहरों बद-हवासी छाई रह जाए तो फिर

सारी दुनिया सारी साँसें गिरवी रख के देख लो
क़र्ज़ फिर भी माँ का पाई पाई रह जाए तो फिर