उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zamane ki satai KHud-kushi hai

ज़माने की सताई ख़ुद-कुशी है

زمانے کی ستائی خودکشی ہے

शायर: Ejaaz tawakkal7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़माने की सताई ख़ुद-कुशी है
मोहब्बत इब्तिदाई ख़ुद-कुशी है

जहाँ सफ़्फ़ाक आँखें घात में हों
वहाँ चेहरा-नुमाई ख़ुद-कुशी है

मैं राय इश्क़ पर अब और क्या दूँ
कहा तो है कि भाई ख़ुद-कुशी है

मैं उस को फूल दे कर ख़ुश नहीं हूँ
कि ये भी दिल-रुबाई ख़ुद-कुशी है

ये इस्ति'माल करने पर खुला है
कि ख़ुशबू कीमयाई ख़ुद-कुशी है

शिकारी घात में बैठा हो तो फिर
परिंदे की रिहाई ख़ुद-कुशी है

किसी तितली का मर जाना अज़ीज़ो
हक़ीक़त में निसाई ख़ुद-कुशी है