उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ho ke barik mil rahi hai mujhe

हो के बारीक मिल रही है मुझे

ہو کے باریک مل رہی ہے مجھے

शायर: Ejaaz tawakkal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हो के बारीक मिल रही है मुझे
हर ख़बर वीक मिल रही है मुझे

ख़ुश बहुत हैं हम एक दूसरे से
ज़िंदगी ठीक मिल रही है मुझे

फूल है इश्क़ का सुहूलत-कार
इस से तहरीक मिल रही है मुझे

मुतमइन हूँ के साहबो हर चीज़
घर के नज़दीक मिल रही है मुझे

मह-वशों को दुआएँ देता हूँ
हुस्न की भीक मिल रही है मुझे

मैं तयक़्क़ुन की खोज में था मियाँ
और तश्कीक मिल रही है मुझे