उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zaban ko band karen ya mujhe asir karen

ज़बाँ को बंद करें या मुझे असीर करें

زباں کو بند کریں یا مجھے اسیر کریں (ردیف .. ے)

शायर: Chakbast Braj Narayan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़बाँ को बंद करें या मुझे असीर करें
मिरे ख़याल को बेड़ी पिन्हा नहीं सकते

ये कैसी बज़्म है और कैसे उस के साक़ी हैं
शराब हाथ में है और पिला नहीं सकते

ये बेकसी भी अजब बेकसी है दुनिया में
कोई सताए हमें हम सता नहीं सकते

कशिश वफ़ा की उन्हें खींच लाई आख़िर-कार
ये था रक़ीब को दा'वा वो आ नहीं सकते

जो तू कहे तो शिकायत का ज़िक्र कम कर दें
मगर यक़ीं तिरे वा'दों पे ला नहीं सकते

चराग़ क़ौम का रौशन है अर्श पर दिल के
उसे हवा के फ़रिश्ते बुझा नहीं सकते