उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil hi bujha hua hai to lutf-e-bahaar kya

दिल ही बुझा हुआ है तो लुत्फ़-ए-बहार क्या

دل ہی بجھا ہوا ہے تو لطف بہار کیا

शायर: Chakbast Braj Narayan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल ही बुझा हुआ है तो लुत्फ़-ए-बहार क्या
साक़ी है क्या शराब है क्या सब्ज़ा-ज़ार क्या

ये दिल की ताज़गी है वो दिल की फ़सुर्दगी
इस गुलशन-ए-जहाँ की ख़िज़ाँ क्या बहार क्या

जिस की क़फ़स में आँख खुली हो मिरी तरह
उस के लिए चमन की ख़िज़ाँ क्या बहार क्या

बाद-ए-फ़ना फ़ुज़ूल है नाम-ओ-निशाँ की फ़िक्र
जब हम नहीं रहे तो रहेगा मज़ार क्या

आ'माल का तिलिस्म है नैरंग-ए-रोज़गार
तक़दीर क्या है गर्दिश-ए-लैल-ओ-नहार क्या

तफ़्सीर-ए-हाल-ए-ज़ार है बस इक निगाह-ए-यास
हो दास्तान-ए-दर्द का और इख़्तिसार क्या

छिटकी हुई है गोर-ए-ग़रीबाँ पे चाँदनी
है बेकसों को फ़िक्र-ए-चराग़-ए-मज़ार क्या