उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fana nahin hai mohabbat ke rang-o-bu ke liye

फ़ना नहीं है मोहब्बत के रंग-ओ-बू के लिए

فنا نہیں ہے محبت کے رنگ و بو کے لئے

शायर: Chakbast Braj Narayan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़ना नहीं है मोहब्बत के रंग-ओ-बू के लिए
बहार-ए-आलम-ए-फ़ानी रहे रहे न रहे

जुनून-ए-हुब्ब-ए-वतन का मज़ा शबाब में है
लहू में फिर ये रवानी रहे रहे न रहे

रहेगी आब-ओ-हवा में ख़याल की बिजली
ये मुश्त-ए-ख़ाक है फ़ानी रहे रहे न रहे

जो दिल में ज़ख़्म लगे हैं वो ख़ुद पुकारेंगे
ज़बाँ की सैफ़-बयानी रहे रहे न रहे

दिलों में आग लगे ये वफ़ा का जौहर है
ये जम्अ' ख़र्च-ए-ज़बानी रहे रहे न रहे

जो माँगना है अभी माँग लो वतन के लिए
ये आरज़ू की जवानी रहे रहे न रहे