उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zat mein maujud maujon ki rawani se uTha

ज़ात में मौजूद मौजों की रवानी से उठा

ذات میں موجود موجوں کی روانی سے اٹھا

शायर: Naeem Sameer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़ात में मौजूद मौजों की रवानी से उठा
ज़िंदगी का लुत्फ़ तर्ज़-ए-ज़िंदगानी से उठा

या मिरे लोगों को दे या-रब समाअ'त का शुऊ'र
या मिरी आवाज़ गोश-ए-ला-मआ'नी से उठा

आईने को अक्स की ज़ंजीर से आज़ाद कर
चेहरगी को ख़ाल-ओ-ख़द की तर्जुमानी से उठा

इक नई ही शक्ल पैदा कर शिकस्त-ओ-रेख़्त से
इक नया मफ़्हूम अपनी राइगानी से उठा

एक बाज़ू से उठा तू मशअ'ल-ए-मंज़िल 'समीर'
और सफ़र का बोझ अपने दस्त-ए-सानी से उठा