उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aur teri to kisi baat se inkar nahin

और तेरी तो किसी बात से इंकार नहीं

اور تیری تو کسی بات سے انکار نہیں

शायर: Naeem Sameer6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

और तेरी तो किसी बात से इंकार नहीं
वो जो हर बार हुआ है वही इस बार नहीं

हम को किस सम्त में जाना है ये समझाए कौन
और हम लोग समझने को भी तय्यार नहीं

बाल-ओ-पर से नहीं उड़ता हूँ जुनूँ से अपने
पाँव ज़ंजीर हुए हैं मिरी रफ़्तार नहीं

आँख पर ख़ौफ़ का पर्दा भी तो हो सकता है
ये जो दीवार नज़र आती है दीवार नहीं

जो तुझे देखना होता है वही देखता है
तेरी आँखों में तिरे ख़्वाब हैं आज़ार नहीं

रात होते ही घरों को जो पलटते हैं 'समीर'
ये उजालों के तरफ़-दार हैं हक़दार नहीं