उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHamushi ke batn se ye guftani paida hui

ख़ामुशी के बत्न से ये गुफ़्तनी पैदा हुई

خامشی کے بطن سے یہ گفتنی پیدا ہوئی

शायर: Naeem Sameer5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ामुशी के बत्न से ये गुफ़्तनी पैदा हुई
मैं ब-ज़ाहिर चुप हुआ और शायरी पैदा हुई

इस तरह साबित हुआ ग़म और ख़ुशी का इम्तिज़ाज
हँसते हँसते उस की आँखों में नमी पैदा हुई

जुर्म की पादाश में हम ख़ाक पर फेंके गए
सो यहाँ पर इंतिक़ामन ज़िंदगी पैदा हुई

ख़ौफ़ ने ही मस्लहत की राह भी ईजाद की
मैं अँधेरों से डरा और रौशनी पैदा हुई

दिल में कब उतरी किसी के बे-मआ'नी गुफ़्तुगू
बात करने से तो बस आवाज़ ही पैदा हुई